गायत्री मंत्र | ॐ भूर्भुवः स्वः | Gayatri Mantra PDF in Hindi

गायत्री महामन्त्र हिंदी अर्थ सहित PDF Free Download

भारत में सबसे ज्यादा बोला जाने वाला मंत्र है, ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) को सदैव recite करता है, उस व्यक्ति के जीवन में कभी भी दुख नहीं आता, इसे भारत के सभी राज्यों में बोला जाता है. चाहे कोई किसी भी भाषा का हो, प्रत्येक व्यक्ति इस संस्कृत के प्रभावशाली मंत्र को जरूर बोलता है.

इसके अतिरिक्त देश विदेशों में भी इस मंत्र का प्रचलन बहुत ज्यादा है. ऐसा देखा गया है कि जो व्यक्ति संस्कृत भाषा सीख रहा हूं, वह इस मंत्र से ही शुरुआत करता है.

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो ।
देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।।

अर्थ: हम ईश्वर की महिमा का ध्यान करते हैं, जिसने इस संसार को उत्पन्न किया है, जो पूजनीय है, जो ज्ञान का भंडार है, जो पापों तथा अज्ञान की दूर करने वाला हैं- वह हमें प्रकाश दिखाए और हमें सत्य पथ पर ले जाए।

om bhur bhuva swaha tat savitur varenyam
bhargo devasya dhimahi dhiyo yonah prachodayat

फायदे – Gayatri Mantra Ke Fayde

  • सभी प्रकार की समस्याएं परेशानियां दूर हो जाती है.
  • यदि आप पूरी तन्मयता से ही जाप करते हैं तो भगवान आपको सन्मार्ग की ओर प्रेरित करेगा.
  • विद्यार्थियों के लिए वैसे भी इस मंत्र को सबसे प्रभावशाली माना गया है. इससे आप सदैव निरोगी रहेंगे तथा पढ़ाई में आपका मन लगा रहेगा.
  • यदि आपके सभी काम बिगड़ रहे हैं तो स्तोत्र का जाप करने से आपकी वह समस्या भी दूर हो जाएगी.
  • इसका एक और लाभ यह भी है इससे आपकी त्वचा में चमक आने लगती है.
  • यदि आप 108 बार का जाप करते हैं, तो आप को मनचाहा वरदान मिलता है.

गायत्री मंत्र का जाप कैसे करें?

शुक्रवार को सबसे पहले पीले वस्त्र पहनें. तथा हाथी पर विराजमान गायत्री मां का ध्यान करें. ध्यान करने के बाद अब मंत्र को बोलना प्रारंभ करें. ऐसा कहा जाता है कि यदि आप 108 बार जाप करते हैं, तो आपको सबसे अधिक लाभ मिलता है.

जाप करने के कुछ नियम –

  • आपको इस मंत्र को बोलने से पहले स्नान जरूर करना चाहिए.
  • स्वच्छ वस्त्र पहने.
  • तुलसी या चंदन की माला जरूर पहने.
  • चटाई पर बैठकर फिर Mantra का उच्चारण करें.
  • खानपान शुद्ध एवं पवित्र होना चाहिये.
  • हो सके तो आपको स्वच्छ एवं सूती वस्त्र पहनने चाहिए.
  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूर्व दिशा की ओर तथा संध्या काल में पश्चिम दिशा की ओर मुख करना चाहिए.

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