प्रातः स्मरण मंत्र | Karagre Vasate Lakshmi Mantra PDF

सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से पहले प्रातः स्मरण करना चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में कहा गया है, कि जैसे ही आप सुबह उठते हैं, अपना पैर पृथ्वी पर रखने से पहले आपको अपने हाथों को देखना चाहिए, उसके बाद कराग्रे वसते लक्ष्मी मंत्र को बोलना चाहिए.

ऐसा इसलिए करना चाहिए क्योंकि कहा जाता है, कि इस मंत्र को बोलने से ही राष्ट्र के प्रति भक्ति एवं प्रेम एवं सर्वशक्तिमान पर विश्वास बढ़ता है. तथा आपका मातृभूमि के प्रति प्रेम बढ़ जाता है.

कराग्रे वसते लक्ष्मी मंत्र (Pratah Smaran Mantra) Lyrics in Hindi PDF With Meaning

कराग्रे वसते लक्ष्मी:, करमध्ये सरस्वती ।
कर मूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम ॥१॥

इस संपूर्ण श्लोक का अर्थ है – हाथ के अग्रभाग में धन की देवी लक्ष्मी का वास होता है, तथा मध्य भाग में सरस्वती, मूल भाग में गोविंद अर्थात भगवान विष्णु का निवास होता है, यह सभी देवी देवता आपके दिन को मंगलमय करें.

समुद्रवसने देवि ! पर्वतस्तनमंड्ले ।
विष्णुपत्नि! नमस्तुभ्यं पाद्स्पर्श्म क्षमस्वे ॥२॥

अर्थ – साथ ही आगे कहा गया है, कि समुद्ररूपी वस्त्र को पहनने वाली, जिसने पर्वतों को धारण किया हुआ है, भगवान विष्णु की पत्नी पृथ्वी मुझे माफ करें, क्योंकि उन्हें मेरे पैरों का स्पर्श होता है, इसलिए क्षमायाचना करता हूँ।

ब्रह्मा मुरारीस्त्रिपुरांतकारी
भानु: शाशी भूमिसुतो बुधश्च ।
गुरुश्च शुक्र: शनि-राहु-केतवः
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥३॥

अर्थ – तीनों देवता ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश तथा सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु यह सभी ग्रह  एवं  सभी देव मेरे प्रभात को शुभ एवं मंगलमय करें.

सनत्कुमार: सनक: सन्दन:
सनात्नोप्या सुरिपिंलग्लौ च ।
सप्त स्वरा: सप्त रसातलनि 
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥४॥

अर्थ – ब्रह्मा जी के मानस पुत्र बाल ऋषि सनत कुमार सनक सनन्दन तथा सनातन तथा आसुरी एवं छंदो का ज्ञान कराने वाले मुनि पिंगल जी को मेरे सुप्रभात को मंगलमय करें. साथ ही ब्रह्म-नाद के सात स्वर, सातों रसातल मेरे सुप्रभात को मंगलमय करें।

सप्तार्णवा: सप्त कुलाचलाश्च
सप्तर्षयो द्वीपवनानि सप्त।
भूरादिकृत्वा भुवनानि सप्त
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥५॥

अर्थ – सात समुद्र,  सात पर्वत, सप्तऋषि, सातों द्वीप, सातों वन ,  भूलोक तथा सातों भुवन  यह सभी मेरे सुप्रभात को मंगलमय करें।

पृथ्वी सगंधा सरसास्तापथाप:
स्पर्शी च वायु ज्वर्लनम च तेज:
नभ: सशब्दम महता सहैव

कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥६॥

अर्थ – अपने गुण रूपी गंध से युक्त पृथ्वी, रस से युक्त जल, स्पर्श से युक्त वायु, ज्वलनशील से भी तेज तथा शब्द रूपी गुणों से युक्त आकाश महत् तत्व बुद्धि के साथ मेरे प्रभात को मंगलमय करें अर्थात यह सभी पांचों तत्व कल्याणकारी हो.

प्रातः स्मरणमेतद यो
विदित्वाssदरत: पठेत।
स सम्यग धर्मनिष्ठ: स्यात्
संस्मृता अखंड भारत: ॥७॥

श्लोक का अर्थअतः जो भी इस प्रातः समरण का आदरपूर्वक पाठ करेगा वह अखंड भारत की स्मृति मन में संजाये हुए धर्म एवं कर्त्तव्य के प्रति सदैव निष्ठावान और प्रामाणिक बना रहेगा।

  • Karāgrē vasatē lakṣmī:, Karamadhyē sarasvatī.
  • Kara mūlē tu gōvinda:, Prabhātē karadarśanama
  • samudravasanē dēvi! Parvatastanamaṇḍlē.
  • Viṣṇupatni! Namastubhyaṁ pādsparśma kṣamasvē.
  • brahmā murārīstripurāntakārī
  • bhānu: Śāśī bhūmisutō budhaśca.
  • Guruśca śukra: Śani-rāhu-kētavaḥ
  • kurvantu sarvē mama suprabhātama.
  • Sanatkumāra: Sanaka: Sandana:
  • Sanātnōpyāssuripinlaglau ca.
  • Sapta svarā: Sapta rasātalani
  • kurvantu sarvē mama suprabhātama.
  • Saptārṇavā: Sapta kulācalāśca
  • saptarṣayō dvīpavanāni sapta
  • bhooraadikrtva bhuvanaani sapt
  • kurvantu sarvē mama suprabhātama.
  • Pr̥thvī sagandhā sarasāstāpathāpa:
  • Sparśī ca vāyu jvarlanama ca tēja:
  • Nabha: Saśabdama mahatā sahaiva
  • kurvantu sarvē mama suprabhātama.
  • Prātaḥ smaraṇamētada yō
  • viditvāssdarata: Paṭhēta.
  • Sa samyaga dharmaniṣṭha: Syāt
  • sansmr̥tāsakhaṇḍa bhārata

प्रातः स्मरण मंत्र के लाभ – Benefits of Karagre Vasate Lakshmi

  • ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस मंत्र को रोज सुबह बोलता है, उसे प्रत्येक संघर्ष पर विजय हासिल होती है.
  • इस मंत्र से आत्मविश्वास बढ़ता है.
  • यदि आप पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाते हो, तो आप का फोकस बढ़ता है.
  • आपकी दृष्टि मजबूत होती है.
  • छात्रों के लिए सबसे फायदेमंद होता है.

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